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| May 22, 2026

एमसीएलआर बनाम ईबीएलआर - होम लोन पर कौन अधिक बचत करता है?

यदि आप होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहला कदम यह समझना है कि आपकी ब्याज दर कैसे तय होती है। भारत में एमसीएलआर रेट और ईबीएलआर दो महत्वपूर्ण बेंचमार्क हैं। इन संक्षिप्त शब्दों का पूरा नाम, उनका अर्थ और उनके बीच का अंतर समझना जरूरी है, ताकि आप यह तय कर सकें कि आपके होम लोन की पूरी अवधि में कौन-सा विकल्प अधिक बचत करा सकता है।

विषय सूची

एमसीएलआर क्या है?

  • एमसीएलआर का पूरा नाम Marginal Cost of Funds Based Lending Rate है। एमसीएलआर का अर्थ बैंक द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक आंतरिक बेंचमार्क से है, जो उनकी फंडिंग लागत (जमा राशि सहित), संचालन खर्च, रिजर्व आवश्यकताओं और मार्जिन को दर्शाता है।
  • एमसीएलआर के तहत, जब आप होम लोन लेते हैं, तो बैंक अपने प्रकाशित एमसीएलआर में एक अतिरिक्त स्प्रेड जोड़कर आपकी ब्याज दर तय करते हैं।
  • इसकी कमी यह है कि RBI की रेपो रेट या अन्य मौद्रिक नीतियों में बदलाव का प्रभाव एमसीएलआर आधारित लोन दरों पर आने में समय लग सकता है, क्योंकि बैंक एमसीएलआर को केवल निश्चित अंतराल (जैसे 6 महीने या 1 वर्ष) पर संशोधित करते हैं।

ईबीएलआर क्या है?

  • ईबीएलआर का पूरा नाम External Benchmark Lending Rate है, जिसे कभी-कभी “Linked Rate” भी कहा जाता है। ईबीएलआर रेट का अर्थ ऐसी फ्लोटिंग ब्याज दर से है जो सीधे किसी बाहरी बेंचमार्क (जैसे RBI की रेपो रेट या FBIL द्वारा प्रकाशित ट्रेजरी बिल यील्ड) से जुड़ी होती है।
  • होम लोन लेने वालों के लिए ईबीएलआर यह सुनिश्चित करता है कि RBI द्वारा ब्याज दरों में किए गए बदलाव तेजी से ब्याज दरों और EMI (समान मासिक किस्त) में दिखाई दें।
  • बैंक अंतिम ईबीएलआर आधारित ब्याज दर तय करने के लिए बाहरी बेंचमार्क पर स्प्रेड या क्रेडिट रिस्क प्रीमियम जोड़ सकते हैं।

विशेषता

एमसीएलआर

ईबीएलआर

बेंचमार्क का प्रकार

आंतरिक (बैंक की लागत आधारित घटक)

बाहरी (जैसे रेपो रेट, ट्रेजरी बिल यील्ड)

दर परिवर्तन की गति

धीमी; बैंक समय-समय पर MCLR संशोधित करते हैं

तेज; बेंचमार्क बदलते ही असर जल्दी दिखता है

EMI में उतार-चढ़ाव

कम, अल्पकाल में अधिक स्थिर

अधिक, ब्याज दरों के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील

पारदर्शिता

मध्यम; आंतरिक लागत घटक पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते

अधिक; बाहरी बेंचमार्क सार्वजनिक और नियंत्रित होते हैं

प्रयोग की समयरेखा

पुराने लोन समझौतों (2019 से पहले) में उपयोग

अक्टूबर 2019 से नए फ्लोटिंग रिटेल और MSME लोन के लिए अनिवार्य

आपके होम लोन पर कौन अधिक बचत करता है?

घटती ब्याज दरों के दौर में:

यदि आपको उम्मीद है कि RBI नीतिगत दरों में कटौती करेगा, तो ईबीएलआर अधिक लाभकारी हो सकता है। क्योंकि यह सीधे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा होता है, इसलिए उधारकर्ताओं को दरों में कटौती के तुरंत बाद कम EMI का लाभ मिल सकता है। जून 2025 में रेपो रेट में कटौती के बाद कई बैंकों ने ईबीएलआर आधारित लोन पर जल्द ही इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया।

बढ़ती या अस्थिर ब्याज दरों के माहौल में:

Marginal Cost of Funds Based Lending Rate ( एमसीएलआर) की धीमी रीसेट प्रक्रिया का मतलब यह हो सकता है कि उधारकर्ता के रूप में आपकी ब्याज लागत बार-बार न बढ़े, जिससे EMI में कुछ स्थिरता बनी रहती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि ब्याज दरों में कमी का सकारात्मक प्रभाव भी देर से मिलता है। दूसरी ओर, ईबीएलआर में जोखिम भी शामिल हैं — यदि बेंचमार्क दरों में तेजी से बढ़ोतरी होती है, तो आपकी ब्याज लागत भी तुरंत बढ़ सकती है।

लंबी अवधि में:

यदि आपके लोन की अवधि लंबी है (जैसे 15–20 वर्ष), तो लंबे समय में ईबीएलआर अधिक बचत करा सकता है, खासकर यदि कुल मिलाकर ब्याज दरें घटती रहें। लेकिन यह बैंक के स्प्रेड, मार्जिन और इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक कितनी तेजी से दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाता है। एमसीएलआर और ईबीएलआर की तुलना करते समय अपने बैंक द्वारा लगाए गए स्प्रेड की जांच करना बेहद जरूरी है। यह तुलना करना महत्वपूर्ण है कि आपका बैंक एमसीएलआर और ईबीएलआर दोनों पर कितना स्प्रेड रखता है।

चुनाव करने से पहले उपयोगी सुझाव

  • अपने वर्तमान बेंचमार्क की जांच करें: कई पुराने होम लोन अभी भी एमसीएलआर से जुड़े हुए हैं। यह जानना आपको समझने में मदद करेगा कि ईबीएलआर पर स्विच करने से आपको कितना लाभ मिल सकता है।
  • EMI की तुलना करें: आप ऑनलाइन कैलकुलेटर का उपयोग करके एमसीएलआर + स्प्रेड और ईबीएलआर + स्प्रेड की तुलना विभिन्न संभावित ब्याज दर परिवर्तनों के आधार पर कर सकते हैं।
  • स्प्रेड और मार्जिन के बारे में पूछें: यदि एमसीएलआर पर स्प्रेड कम है, तो ईबीएलआर तेज होने के बावजूद MCLR अधिक आकर्षक विकल्प बन सकता है।
  • जोखिम लेने की क्षमता महत्वपूर्ण है: यदि आपको ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव पसंद नहीं है, तो एमसीएलआर की स्थिरता आपके लिए अधिक उपयुक्त हो सकती है।
  • RBI की नीतियों पर नजर रखें: ईबीएलआर आधारित होम लोन में बेंचमार्क दरों में बदलाव का प्रभाव अधिक होता है।

होम लोन लेने वालों के लिए एमसीएलआर और ईबीएलआर का अर्थ, पूरा नाम और ईबीएलआर बनाम एमसीएलआर की तुलना को समझना बेहद आवश्यक है। ईबीएलआर अधिक पारदर्शी है और ब्याज दरों में बदलाव का असर तेजी से ग्राहकों तक पहुंचाता है, इसलिए घटती ब्याज दरों के दौर में यह अधिक आकर्षक हो सकता है। दूसरी ओर, एमसीएलआर स्थिरता और निश्चितता प्रदान करता है, जो कुछ उधारकर्ताओं के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। अंततः आपकी बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि भविष्य में ब्याज दरें किस दिशा में जाती हैं, आपके लोन की अवधि क्या है, और आपका बैंक किस प्रकार स्प्रेड तय करता है।

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